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श्लोक  5.6.40 
अर्चिर्भिश्चापि रत्नानां तेजसा रावणस्य च।
विरराज च तद् वेश्म रश्मिवानिव रश्मिभि:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
मणियों की किरणों और रावण के तेज से वह घर सूर्य की किरणों के समान चमक रहा था।
 
Due to the rays of the gems and the brilliance of Ravana that house was shining like the sun with its rays. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)