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श्लोक 5.6.20  |
वज्रदंष्ट्रस्य च तथा पुप्लुवे स महाकपि:।
शुकस्य च महावेग: सारणस्य च धीमत:॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| इसके बाद महान् एवं वेगशाली महाकपि हनुमान्जी पुनः उछलकर वज्रदंष्ट्र, शुक और बुद्धिमान् सारण के घर पहुँचे॥20॥ |
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| After this, the great and swift Mahakapi Hanuman again jumped and reached the houses of Vajradanshtra, Shuka and wise Saran. 20॥ |
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