श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.6.17 
अवप्लुत्य महावेग: प्रहस्तस्य निवेशनम्।
ततोऽन्यत् पुप्लुवे वेश्म महापार्श्वस्य वीर्यवान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाबली, वेगशाली और पराक्रमी हनुमान् वहाँ से कूदकर प्रहस्त के भवन में उतरे और फिर वहाँ से कूदकर महापार्श्व के महल में पहुँचे॥17॥
 
Hanuman, the great, swift and mighty warrior, jumped from there and landed in Prahasta's house. Then he jumped from there and reached Mahaparshva's palace. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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