श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 59: हनुमान जी का सीता की दुरवस्था बताकर वानरों को लङ्का पर आक्रमण करने के लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.59.3 
आर्याया: सदृशं शीलं सीताया: प्लवगर्षभा:।
तपसा धारयेल्लोकान् क्रुद्धा वा निर्दहेदपि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे वानरशिरोमणि! जिस स्त्री का चरित्र और स्वभाव आर्या सीता के समान है, वह अपनी तपस्या से सम्पूर्ण लोकों को धारण कर सकती है अथवा क्रोध करने पर तीनों लोकों को जला सकती है॥3॥
 
O Vanarashiromania! The woman whose character and nature is like that of Arya Sita, can hold all the worlds by her austerity or can burn down the three worlds in case of anger.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)