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रामसुग्रीवसख्यं च श्रुत्वा प्रीतिमुपागता।
नियत: समुदाचारो भक्तिर्भर्तरि चोत्तमा॥ २९॥
अनुवाद
श्री राम और सुग्रीव की मित्रता सुनकर वे बहुत प्रसन्न हुए । सीताजी में दृढ़ पातिव्रत्य है । उनके हृदय में अपने पति के प्रति बड़ी भक्ति है । 29॥
He was very happy to hear about the friendship between Shri Ram and Sugriva. Sitaji has strong moral values (Pativratya). She has great devotion in her heart towards her husband. 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥