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ramayan 5.59.21: 'दुष्टात्मा रावण की अशोक वाटिका के मध्य में अशोक वृक्ष के नीचे धर्मपरायण सीता बड़ी दयनीय अवस्था में रहती हैं।   |   ramayan सर्ग 5.59: हनुमान जी का सीता की दुरवस्था बताकर वानरों को लङ्का पर आक्रमण करने के लिये उत्तेजित करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.59.21 
अशोकवनिकामध्ये रावणस्य दुरात्मन:।
अधस्ताच्छिंशपामूले साध्वी करुणमास्थिता॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'दुष्टात्मा रावण की अशोक वाटिका के मध्य में अशोक वृक्ष के नीचे धर्मपरायण सीता बड़ी दयनीय अवस्था में रहती हैं।
 
‘In the centre of the Ashok Vatika of the evil-souled Ravan, under an Ashoka tree, the pious Sita lives in a very pitiable state.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)