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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 59: हनुमान जी का सीता की दुरवस्था बताकर वानरों को लङ्का पर आक्रमण करने के लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  5.59.11-12h 
भवतामभ्यनुज्ञातो विक्रमो मे रुणद्धि तम्।
मयातुला विसृष्टा हि शैलवृष्टिर्निरन्तरा॥ ११॥
देवानपि रणे हन्यात् किं पुनस्तान् निशाचरान्।
 
 
अनुवाद
यदि आपकी अनुमति मिले तो मेरा पराक्रम रावण को निराश कर देगा। मैं निरन्तर जो अद्वितीय पत्थरों की वर्षा करूँगा, उससे युद्धस्थल में देवता भी मर जाएँगे; फिर उन रात्रिचर जीवों का क्या होगा?॥11 1/2॥
 
‘If I get your permission, my prowess will frustrate Ravana. The unparalleled rain of stones that I will continuously shower will kill even the gods on the battlefield; then what about those night creatures?॥ 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)