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ramayan 5.58.94-95h: ‘पहले मैंने इक्ष्वाकुवंश की स्तुति की। राजाओं की स्तुति से सुशोभित मेरे वचन सुनकर देवी सीता के नेत्रों में आँसू भर आए और वे मुझसे बोलीं -॥94 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.94-95h 
इक्ष्वाकुकुलवंशस्तु स्तुतो मम पुरस्कृत:।
श्रुत्वा तु गदितां वाचं राजर्षिगणभूषिताम्॥ ९४॥
प्रत्यभाषत मां देवी बाष्पै: पिहितलोचना।
 
 
अनुवाद
‘पहले मैंने इक्ष्वाकुवंश की स्तुति की। राजाओं की स्तुति से सुशोभित मेरे वचन सुनकर देवी सीता के नेत्रों में आँसू भर आए और वे मुझसे बोलीं -॥94 1/2॥
 
‘First I praised the Ikshwaku dynasty. Hearing my words adorned with the praise of the kings, Goddess Sita's eyes filled with tears and she said to me -॥94 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)