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श्लोक 5.58.91-92h  |
तत: सा ह्रीमती बाला भर्तुर्विजयहर्षिता॥ ९१॥
अवोचद् यदि तत् तथ्यं भवेयं शरणं हि व:। |
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| अनुवाद |
| 'तब लज्जावती कन्या सीता अपने पति की विजय की संभावना से प्रसन्न होकर बोली - 'यदि यह बात सत्य है तो मैं अवश्य ही तुम दोनों की रक्षा करूँगी।' ॥91 1/2॥ |
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| ‘Then Lajjavati girl Sita became happy at the possibility of her husband's victory and said - 'If this is true then I will certainly protect you both.' ॥91 1/2॥ |
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