श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 91-92h
 
 
श्लोक  5.58.91-92h 
तत: सा ह्रीमती बाला भर्तुर्विजयहर्षिता॥ ९१॥
अवोचद् यदि तत् तथ्यं भवेयं शरणं हि व:।
 
 
अनुवाद
'तब लज्जावती कन्या सीता अपने पति की विजय की संभावना से प्रसन्न होकर बोली - 'यदि यह बात सत्य है तो मैं अवश्य ही तुम दोनों की रक्षा करूँगी।' ॥91 1/2॥
 
‘Then Lajjavati girl Sita became happy at the possibility of her husband's victory and said - 'If this is true then I will certainly protect you both.' ॥91 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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