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श्लोक  5.58.83 
वृथा गर्जितनिश्चेष्टा राक्षस्य: पिशिताशना:।
रावणाय शशंसुस्ता: सीताव्यवसितं महत्॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
जब उनकी सारी गर्जना और प्रयास व्यर्थ हो गए, तो मांसभक्षी राक्षसियां ​​रावण के पास गईं और उसे सीता के महान संकल्प के बारे में बताया।
 
After all their roaring and efforts had gone in vain, the flesh-eating demonesses went to Ravana and told him about Sita's great resolve.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)