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ramayan 5.58.72-73h: 'अरे दुष्ट पापी! तुझमें क्या वीरता है? जब मेरे पति नहीं थे, तब तूने उस महात्मा की दृष्टि से छिपकर मुझे चुपके से अपहरण कर लिया।'   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.72-73h 
किंस्विद्वीर्य तवानार्य यो मां भर्तुरसंनिधौ॥ ७२॥
अपहृत्यागत: पाप तेनादृष्टो महात्मना।
 
 
अनुवाद
'अरे दुष्ट पापी! तुझमें क्या वीरता है? जब मेरे पति नहीं थे, तब तूने उस महात्मा की दृष्टि से छिपकर मुझे चुपके से अपहरण कर लिया।'
 
‘You wicked sinner! What valour do you possess? When my husband was not around, you secretly kidnapped me, hiding from the eyes of that great soul. 72 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)