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राक्षसाधम रामस्य भार्याममिततेजस:।
इक्ष्वाकुवंशनाथस्य स्नुषां दशरथस्य च॥ ७१॥
अवाच्यं वदतो जिह्वा कथं न पतिता तव।
अनुवाद
हे नीच राक्षस! जब तूने महाप्रतापी भगवान राम की पत्नी और इक्ष्वाकुवंशी राजा दशरथ की पुत्रवधू से यह अवर्णनीय बात कही थी, तब तेरी जीभ क्यों नहीं गिरी?॥ 71 1/2॥
You vile demon! Why did your tongue not drop when you said this unspeakable thing to the wife of the illustrious Lord Rama and the daughter-in-law of King Dasharatha, the lord of the Ikshvaku clan?॥ 71 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥