श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  5.58.70 
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य रावणस्य दुरात्मन:।
उवाच परमक्रुद्धा सीता वचनमुत्तमम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
दुष्टबुद्धि रावण के ये वचन सुनकर सीताजी अत्यंत क्रोधित हो गईं और ये उत्तम वचन कहने लगीं-॥70॥
 
On hearing these words of the evil-minded Ravana, Sita became extremely angry and said these excellent words -॥ 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)