vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना
»
श्लोक 70
श्लोक
5.58.70
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य रावणस्य दुरात्मन:।
उवाच परमक्रुद्धा सीता वचनमुत्तमम्॥ ७०॥
अनुवाद
दुष्टबुद्धि रावण के ये वचन सुनकर सीताजी अत्यंत क्रोधित हो गईं और ये उत्तम वचन कहने लगीं-॥70॥
On hearing these words of the evil-minded Ravana, Sita became extremely angry and said these excellent words -॥ 70॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×