श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.58.62 
तां दृष्ट्वा तादृशीं नारीं रामपत्नीं यशस्विनीम्।
तत्रैव शिंशपावृक्षे पश्यन्नहमवस्थित:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी की पत्नी सीताजी को उस अवस्था में अशोक वृक्ष के नीचे लेटे हुए देखकर मैं भी उस वृक्ष पर बैठ गया और वहीं से उन्हें देखने लगा॥ 62॥
 
Seeing that illustrious lady, Sita, the wife of Sri Rama, lying in that state, sitting under the Ashoka tree, I too sat on that tree and started gazing at them from there.॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)