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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना
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श्लोक 51
श्लोक
5.58.51
अहं लङ्कापुरी वीर निर्जिता विक्रमेण ते।
यस्मात् तस्माद् विजेतासि सर्वरक्षांस्यशेषत:॥ ५१॥
अनुवाद
हे वीर! मैं साक्षात् लंकापुरी हूँ। तुमने अपने पराक्रम से मुझे जीत लिया है, अतः तुम समस्त राक्षसों पर पूर्ण विजय प्राप्त करोगे।॥ 51॥
Valiant! I am Lankapuri in person. You have conquered me with your valour, hence you will achieve complete victory over all the demons.'॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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