श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  5.58.48-49h 
तत्र प्रविशतश्चापि कल्पान्तघनसप्रभा॥ ४८॥
अट्टहासं विमुञ्चन्ती नारी काप्युत्थिता पुर:।
 
 
अनुवाद
'जैसे ही मैं अंदर गया, प्रलयकाल के बादल के समान श्याम वर्ण वाली एक स्त्री मेरे सामने खड़ी होकर जोर-जोर से हंसने लगी।
 
‘As soon as I entered, a woman with dark complexion like a cloud at the time of doomsday stood in front of me laughing loudly. 48 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)