श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.58.45 
शृणोमि खगतानां च वाच: सौम्या महात्मनाम्।
राक्षसी सिंहिका भीमा क्षिप्रं हनुमता हता॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उस समय मैंने दिव्य सिद्ध महात्माओं की मधुर वाणी सुनी - 'अहा! इस सिंहिका नामक भयंकर राक्षसी को हनुमान जी ने शीघ्र ही मार डाला।'
 
‘At that time I heard the gentle voice of the celestial Siddha Mahatmas saying - 'Oh! This fearsome demoness named Singhika was quickly killed by Hanuman Ji.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)