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ramayan 5.58.39: वह भयंकर राक्षसी जोर से हँसी और फिर निर्भय होकर खड़ी हो गई और गरजती हुई मुझसे ये अशुभ वचन कहने लगी-॥39॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.39 
प्रहस्य च महानादमुक्तोऽहं भीमया तया।
अवस्थितमसम्भ्रान्तमिदं वाक्यमशोभनम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
वह भयंकर राक्षसी जोर से हँसी और फिर निर्भय होकर खड़ी हो गई और गरजती हुई मुझसे ये अशुभ वचन कहने लगी-॥39॥
 
That horrific female demon laughed loudly and then stood up fearlessly and thunderingly told me these ominous words -॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)