श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.58.22 
तत: पश्याम्यहं देवीं सुरसां नागमातरम्।
समुद्रमध्ये सा देवी वचनं चेदमब्रवीत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तभी मुझे समुद्र के बीच में नागमाता सुरसादेवी के दर्शन हुए। देवी सुरसा मुझसे इस प्रकार बोलीं -
 
Then I saw Nagamata Sursadevi in ​​the middle of the sea. Goddess Surasa spoke to me like this -
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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