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ramayan 5.58.2-4: जब सभी महामनस्वी वानर वहाँ सुखपूर्वक बैठ गए, तब जाम्बवान ने हर्ष में भरकर पवनपुत्र महाकन्या हनुमान् से प्रेमपूर्वक कार्य की सफलता के विषय में पूछा - 'महाकन्या! तुमने देवी सीता को किस प्रकार देखा? वे वहाँ किस प्रकार रहती हैं? तथा क्रूर रावण उनके प्रति कैसा व्यवहार करता है? ये सब बातें हमें ठीक-ठीक बताओ।॥ 2-4॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.2-4 
प्रीतिमत्सूपविष्टेषु वानरेषु महात्मसु।
तं तत: प्रतिसंहृष्ट: प्रीतियुक्तं महाकपिम्॥ २॥
जाम्बवान् कार्यवृत्तान्तमपृच्छदनिलात्मजम्।
कथं दृष्टा त्वया देवी कथं वा तत्र वर्तते॥ ३॥
तस्यां चापि कथं वृत्त: क्रूरकर्मा दशानन:।
तत्त्वत: सर्वमेतन्न: प्रब्रूहि त्वं महाकपे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब सभी महामनस्वी वानर वहाँ सुखपूर्वक बैठ गए, तब जाम्बवान ने हर्ष में भरकर पवनपुत्र महाकन्या हनुमान् से प्रेमपूर्वक कार्य की सफलता के विषय में पूछा - 'महाकन्या! तुमने देवी सीता को किस प्रकार देखा? वे वहाँ किस प्रकार रहती हैं? तथा क्रूर रावण उनके प्रति कैसा व्यवहार करता है? ये सब बातें हमें ठीक-ठीक बताओ।॥ 2-4॥
 
When all the great-minded monkeys sat there happily, then Jambavan, filled with joy, lovingly asked the great ape Hanuman, the son of the wind, about the success of the task - 'Great ape! How did you see Goddess Sita? How does she live there? And how does the cruel Ravana behave towards her? Tell us all these things precisely.॥ 2-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)