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श्लोक  5.58.18-19 
एतच्छ्रुत्वा मया तस्य मैनाकस्य महात्मन:॥ १८॥
कार्यमावेद्य च गिरेरुद्धतं वै मनो मम।
तेन चाहमनुज्ञातो मैनाकेन महात्मना॥ १९॥
 
 
अनुवाद
महामना मैनाक की यह बात सुनकर मैंने उनसे अपना कार्य कहा और उनकी अनुमति लेकर वहाँ से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हुआ। तब महाकाय मैनाक ने मुझे जाने की अनुमति दे दी॥18-19॥
 
‘After listening to this from Mahamana Mainak, I told him about my work and after taking his permission, I felt encouraged to move forward from there. Mahakay Mainak then gave me permission to leave.॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)