श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 168
 
 
श्लोक  5.58.168 
राघवस्य प्रसादेन भवतां चैव तेजसा।
सुग्रीवस्य च कार्यार्थं मया सर्वमनुष्ठितम्॥ १६८॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी की कृपा और आप सबके प्रभाव से मैंने सुग्रीव के कार्य की सफलता के लिए सब कुछ किया है॥168॥
 
‘With the grace of Shri Ramachandraji and the influence of you all, I have done everything for the success of Sugreeva's task.॥ 168॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)