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ramayan 5.58.167: तत्पश्चात् वायु, चन्द्रमा, सूर्य, सिद्ध और गन्धर्वों द्वारा सेवित मार्ग का आश्रय लेकर यहाँ पहुँचकर मैंने आपका दर्शन किया है ॥167॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.167 
तत: श्वसनचन्द्रार्कसिद्धगन्धर्वसेवितम्।
पन्थानमहमाक्रम्य भवतो दृष्टवानिह॥ १६७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वायु, चन्द्रमा, सूर्य, सिद्ध और गन्धर्वों द्वारा सेवित मार्ग का आश्रय लेकर यहाँ पहुँचकर मैंने आपका दर्शन किया है ॥167॥
 
After that, taking the shelter of the path served by the wind, moon, sun, Siddhas and Gandharvas, after reaching here, I have seen you. 167॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)