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ramayan 5.58.159-160: तब मैंने सोचा, 'लंका में ऐसा कोई स्थान नहीं बचा जो जला न गया हो, सारा नगर जलकर राख हो गया है। अतः जानकी भी अवश्य ही नष्ट हो गई होंगी। इसमें कोई संदेह नहीं कि लंका जलाते समय मैंने सीता को भी जला दिया और इस प्रकार प्रभु श्री राम के इस महान कार्य को निष्फल कर दिया।'॥159-160॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.159-160 
विनष्टा जानकी व्यक्तं न ह्यदग्ध: प्रदृश्यते।
लङ्काया: कश्चिदुद्देश: सर्वा भस्मीकृता पुरी॥ १५९॥
दहता च मया लङ्कां दग्धा सीता न संशय:।
रामस्य च महत्कार्यं मयेदं विफलीकृतम्॥ १६०॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने सोचा, 'लंका में ऐसा कोई स्थान नहीं बचा जो जला न गया हो, सारा नगर जलकर राख हो गया है। अतः जानकी भी अवश्य ही नष्ट हो गई होंगी। इसमें कोई संदेह नहीं कि लंका जलाते समय मैंने सीता को भी जला दिया और इस प्रकार प्रभु श्री राम के इस महान कार्य को निष्फल कर दिया।'॥159-160॥
 
Then I thought, 'There is no place in Lanka that is not burnt, the whole city has been burnt to ashes. Hence Janaki must have also perished. There is no doubt that while burning Lanka I burnt Sita too and thus I made this great work of Lord Shri Ram futile.'॥ 159-160॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)