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ramayan 5.58.156: ‘मैंने अपना विशाल रूप छोटा करके उस बंधन से अपने को मुक्त कर लिया और फिर अपने स्वाभाविक रूप में आकर वहीं खड़ा हो गया ॥156॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.156 
ततोऽहं सुमहद्रूपं संक्षिप्य पुनरात्मन:।
विमोचयित्वा तं बन्धं प्रकृतिस्थ: स्थित: पुन:॥ १५६॥
 
 
अनुवाद
‘मैंने अपना विशाल रूप छोटा करके उस बंधन से अपने को मुक्त कर लिया और फिर अपने स्वाभाविक रूप में आकर वहीं खड़ा हो गया ॥156॥
 
‘By shrinking my gigantic form, I freed myself from that bondage and then coming back to my natural form, I stood there.॥ 156॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)