Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.58.15-16: वे अपनी इच्छानुसार सर्वत्र विचरण करते थे और समस्त प्रजा को कष्ट पहुँचाते थे। पर्वतों का ऐसा आचरण सुनकर पुण्यात्मा इन्द्र ने अपने वज्र से उन सहस्रों पर्वतों के पंख काट डाले; किन्तु उस समय तुम्हारे पितामह ने मुझे इन्द्र के हाथों से बचा लिया। | ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे अपनी इच्छानुसार सर्वत्र विचरण करते थे और समस्त प्रजा को कष्ट पहुँचाते थे। पर्वतों का ऐसा आचरण सुनकर पुण्यात्मा इन्द्र ने अपने वज्र से उन सहस्रों पर्वतों के पंख काट डाले; किन्तु उस समय तुम्हारे पितामह ने मुझे इन्द्र के हाथों से बचा लिया।
They used to roam everywhere according to their will, tormenting all the subjects. Hearing such behaviour of the mountains, the pure Lord Indra cut off the wings of these thousands of mountains with his thunderbolt; but at that time your great father saved me from the hands of Indra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥