श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 143
 
 
श्लोक  5.58.143 
क्षिप्रमानीयतां सीता दीयतां राघवस्य च।
यावन्न हरयो वीरा विधमन्ति बलं तव॥ १४३॥
 
 
अनुवाद
वह कहता है कि इससे पहले कि वीर वानर तुम्हारी सेना का विनाश करें, तुम सीता को तुरंत वापस ले आओ और उसे श्री रघुनाथजी को सौंप दो॥143॥
 
He says that you should bring Sita back immediately and hand her over to Sri Raghunatha before the brave monkeys destroy your army.॥ 143॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)