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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना
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श्लोक 137
श्लोक
5.58.137
सुग्रीवश्च महाभाग: स त्वां कौशलमब्रवीत्।
धर्मार्थकामसहितं हितं पथ्यमुवाच ह॥ १३७॥
अनुवाद
महाबली सुग्रीव ने तुम्हारा कुशल-क्षेम पूछा है और धर्म, अर्थ और काम से परिपूर्ण यह हितकर और उपयोगी बात बताई है- ॥1 37॥
The great Sugreeva has asked about your well-being and has told you this beneficial and useful thing full of Dharma, Artha and Kama - ॥1 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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