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ramayan 5.58.136: हे राक्षसराज! मैं जो अपने स्वामी का सन्देश तुमसे कह रहा हूँ, उसे सुनो। वानरराज सुग्रीव ने जो कुछ तुमसे कहा है, उस पर ध्यान दो॥136॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.136 
शृणु चापि समादेशं यदहं प्रब्रवीमि ते।
राक्षसेश हरीशस्त्वां वाक्यमाह समाहितम्॥ १३६॥
 
 
अनुवाद
हे राक्षसराज! मैं जो अपने स्वामी का सन्देश तुमसे कह रहा हूँ, उसे सुनो। वानरराज सुग्रीव ने जो कुछ तुमसे कहा है, उस पर ध्यान दो॥136॥
 
‘Listen to the message of my master which I am telling you. O demon king! Pay attention to what the monkey king Sugreeva has told you.॥ 136॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)