Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.58.125-126: 'मंदोदरी का वह पुत्र युद्धकला में अत्यन्त निपुण था। वह आकाश में उड़ रहा था। उसी समय मैंने अचानक उसके दोनों पैर पकड़ लिए और उसे सौ बार घुमाकर भूमि पर पटक दिया। इस प्रकार वहाँ पड़े हुए कुमार अक्ष को मैंने कुचल दिया॥125-126॥ | ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'मंदोदरी का वह पुत्र युद्धकला में अत्यन्त निपुण था। वह आकाश में उड़ रहा था। उसी समय मैंने अचानक उसके दोनों पैर पकड़ लिए और उसे सौ बार घुमाकर भूमि पर पटक दिया। इस प्रकार वहाँ पड़े हुए कुमार अक्ष को मैंने कुचल दिया॥125-126॥
‘That son of Mandodari was very proficient in the art of war. He was flying in the sky. At that very moment I suddenly caught hold of both his legs and after spinning him around a hundred times I threw him on the ground. In this way I crushed Kumar Aksha who was lying there.॥ 125-126॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥