श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 120-121h
 
 
श्लोक  5.58.120-121h 
तमहं बलसम्पन्नं राक्षसं रणकोविदम्॥ १२०॥
परिघेणातिघोरेण सूदयामि सहानुगम्।
 
 
अनुवाद
वह राक्षस बड़ा बलवान और युद्धकला में निपुण था, फिर भी मैंने उस पर अत्यन्त भयंकर प्रहार करके उसे उसके सेवकों सहित मृत्यु के मुख में भेज दिया॥120 1/2॥
 
That demon was very strong and skilled in the art of war, yet I struck him with a very fierce blow and sent him, along with his servants, to the jaws of death.॥ 120 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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