श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 119-120h
 
 
श्लोक  5.58.119-120h 
तत: प्रहस्तस्य सुतं जम्बुमालिनमादिशत्॥ ११९॥
राक्षसैर्बहुभि: सार्धं घोररूपैर्भयानकै:।
 
 
अनुवाद
तब रावण ने प्रहस्त के पुत्र जम्बुमाली को बहुत से भयंकर रूप वाले राक्षसों के साथ युद्ध करने के लिए भेजा॥119 1/2॥
 
Then Ravana sent Jambumali, the son of Prahasta, along with a large number of fierce looking demons to fight.॥ 119 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)