श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  5.58.116 
तेषामशीतिसाहस्रं शूलमुद‍्गरपाणिनाम्।
मया तस्मिन् वनोद्देशे परिघेण निषूदितम्॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
वे हाथों में भाले और गदाएँ लिए आए थे। उनकी संख्या अस्सी हज़ार थी; परन्तु मैंने उन सबको उस वन प्रदेश में एक ही वार में मार डाला।
 
‘They came with spears and maces in their hands. Their number was eighty thousand; but I killed them all in that forest region with just one blow.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd