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तस्य दुर्बुद्धिता राजंस्तव विप्रियकारिण:।
वधमाज्ञापय क्षिप्रं यथासौ न पुनर्व्रजेत्॥ ११४॥
अनुवाद
महाराज ! अपनी मूर्खता के कारण ही इसने आपके विरुद्ध अपराध किया है । कृपया इसे शीघ्र ही फाँसी देने का आदेश दीजिए, जिससे यह फिर न बच सके ॥114॥
‘Maharaj! It is because of his foolishness that he has committed a crime against you. Please order his execution immediately so that he does not escape again.' ॥ 114॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥