श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  5.58.112 
मां च दृष्ट्वा वने तस्मिन् समागम्य ततस्तत:।
ता: समभ्यागता: क्षिप्रं रावणायाचचक्षिरे॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
मुझे वन में देखकर वे सब लोग इधर-उधर से इकट्ठे होकर तुरंत रावण के पास गए और उससे वन के नाश का सारा समाचार कह सुनाया-॥112॥
 
Seeing me in the forest, all of them gathered from here and there and immediately went to Ravana and told him the whole news of the destruction of the forest -॥ 112॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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