श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  5.58.109 
तच्छ्रुत्वा करुणं वाक्यं क्रोधो मामभ्यवर्तत।
उत्तरं च मया दृष्टं कार्यशेषमनन्तरम्॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
उनके करुण वचन सुनकर राक्षसों के प्रति मेरा क्रोध बहुत बढ़ गया। फिर मैंने शेष आगे के काम के विषय में सोचा॥109॥
 
Hearing his pitiful words, my anger towards the demons increased greatly. Then I thought about the remaining future work.॥ 109॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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