श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  5.58.108 
यदन्यथा भवेदेतद् द्वौ मासौ जीवितं मम।
न मां द्रक्ष्यति काकुत्स्थो म्रिये साहमनाथवत्॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
यदि विपरीत हुआ, तो मेरे जीवन के केवल दो महीने शेष रह गए हैं। उसके बाद श्री रघुनाथजी मुझे दर्शन नहीं दे सकेंगे। मैं अनाथ की भाँति मर जाऊँगा।॥108॥
 
‘If the opposite happens, I have only two months left to live. After that, Shri Raghunathji will not be able to see me. I will die like an orphan.’॥108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)