श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  5.58.104 
इत्युक्त्वा तु वरारोहा मणिप्रवरमुत्तमम्।
प्रायच्छत् परमोद्विग्ना वाचा मां संदिदेश ह॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर सुन्दरी सीता ने मुझे उत्तम चूड़ामणि दी और अत्यन्त व्याकुल होकर वचनों द्वारा अपना सन्देश सुनाया॥104॥
 
Having said this, the beautiful Sita gave me the most exquisite Chudaamani and, being extremely anxious, conveyed her message through words.॥ 104॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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