श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.56.48 
किंनरोरगगन्धर्वयक्षविद्याधरास्तथा।
पीडितं तं नगवरं त्यक्त्वा गगनमास्थिता:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
किन्नर, नाग, गंधर्व, यक्ष और विद्याधर उस डूबते हुए पर्वत को छोड़कर आकाश में जा बसे। 48॥
 
Kinnar, Naga, Gandharva, Yaksha and Vidyadhar left that sinking mountain and settled in the sky. 48॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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