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ramayan 5.56.41-42h: वायुदेव के श्रेष्ठ पुत्र हनुमान्‌जी बड़े वेग से (उछलते हुए) दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर चले, जैसे आकाश में वायु वेग से बहती है॥41 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  5.56.41-42h 
स मारुत इवाकाशं मारुतस्यात्मसम्भव:॥ ४१॥
प्रपेदे हरिशार्दूलो दक्षिणादुत्तरां दिशम्।
 
 
अनुवाद
वायुदेव के श्रेष्ठ पुत्र हनुमान्‌जी बड़े वेग से (उछलते हुए) दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर चले, जैसे आकाश में वायु वेग से बहती है॥41 1/2॥
 
Hanuman, the best son of the wind god, moved with great speed (jumping) from the south to the north direction, just as the wind flows rapidly in the sky. 41 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)