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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  5.56.38-39h 
तेन पादतलक्रान्ता रम्येषु गिरिसानुषु॥ ३८॥
सघोषा: समशीर्यन्त शिलाश्चूर्णीकृतास्तत:।
 
 
अनुवाद
उस पर्वत की सुन्दर चोटियों पर स्थित चट्टानें उनके पैरों के पड़ने पर बड़े जोर की आवाज के साथ टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर जाती थीं। 38 1/2
 
The rocks on the beautiful peaks of that mountain would break into pieces and scatter with a loud noise when their feet struck them. 38 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)