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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.56.36 
महर्षियक्षगन्धर्वकिंनरोरगसेवितम्।
लतापादपसम्बाधं सिंहाधिष्ठितकन्दरम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ महर्षि, यक्ष, गंधर्व, किन्नर और नाग रहते थे। वह चारों ओर से लताओं और वृक्षों से आच्छादित था। उसकी गुफाओं में सिंह दहाड़ रहे थे।
 
Maharishis, Yakshas, ​​Gandharvas, Kinnars and Nagas lived there. It was covered on all sides by creepers and trees. Lions were roaring in its caves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)