Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.56.32: वह कोहरे के कारण गहरी प्रतीत होने वाली शांत गुफाओं में ध्यान कर रहा था। चारों ओर के पर्वत उमड़ते बादलों के समान प्रतीत हो रहे थे, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह सभी दिशाओं में भटक रहा हो। 32. | ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह कोहरे के कारण गहरी प्रतीत होने वाली शांत गुफाओं में ध्यान कर रहा था। चारों ओर के पर्वत उमड़ते बादलों के समान प्रतीत हो रहे थे, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह सभी दिशाओं में भटक रहा हो। 32.
He was meditating in the still caves which appeared deep due to the fog. The surrounding mountains which looked like rising clouds made him seem to be wandering in all directions. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥