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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.56.3 
यदि त्वं मन्यसे तात वसैकाहमिहानघ।
क्वचित् सुसंवृते देशे विश्रान्त: श्वो गमिष्यसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
"पिताजी! हे भोले योद्धा वानर! यदि आप उचित समझें तो यहाँ किसी गुप्त स्थान पर एक दिन और रुकें, आज विश्राम करें और कल चले जाएँ।"
 
"Father! O innocent warrior monkey! If you deem it fit, then stay here for one more day in some secret place, rest today and leave tomorrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)