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ramayan 5.56.23-25h: वहाँ उन्होंने अनेक बड़े-बड़े राक्षसों का वध करके तथा अपनी अपार शक्ति का प्रदर्शन करके पहले ही यश प्राप्त कर लिया था। सीता को आश्वस्त करके, लंकापुरी को अशांत करके, रावण को छल से छलकर, उसे अपनी भयानक शक्ति दिखाकर, वैदेही को प्रणाम करके, उन्होंने समुद्र के बीच से होकर लौटने का निश्चय किया।   |   ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 23-25h
 
 
श्लोक  5.56.23-25h 
राक्षसान् प्रवरान् हत्वा नाम विश्राव्य चात्मन:।
समाश्वास्य च वैदेहीं दर्शयित्वा परं बलम्॥ २३॥
नगरीमाकुलां कृत्वा वञ्चयित्वा च रावणम्।
दर्शयित्वा बलं घोरं वैदेहीमभिवाद्य च॥ २४॥
प्रतिगन्तुं मनश्चक्रे पुनर्मध्येन सागरम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ उन्होंने अनेक बड़े-बड़े राक्षसों का वध करके तथा अपनी अपार शक्ति का प्रदर्शन करके पहले ही यश प्राप्त कर लिया था। सीता को आश्वस्त करके, लंकापुरी को अशांत करके, रावण को छल से छलकर, उसे अपनी भयानक शक्ति दिखाकर, वैदेही को प्रणाम करके, उन्होंने समुद्र के बीच से होकर लौटने का निश्चय किया।
 
He had already gained fame there by killing many big demons and displaying his immense power. After assuring Sita, making Lankapuri restless, tricking Ravana, showing him his terrifying power, paying his respects to Vaidehi, he decided to return through the middle of the ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)