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ramayan 5.56.2: सीताजी अपने पति के प्रेम में मग्न थीं। हनुमानजी को विदा होने के लिए तैयार जानकर वे बार-बार उनकी ओर देखती रहीं और बोलीं-॥2॥   |   ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.56.2 
ततस्तं प्रस्थितं सीता वीक्षमाणा पुन: पुन:।
भर्तु: स्नेहान्विता वाक्यं हनूमन्तमभाषत॥ २॥
 
 
अनुवाद
सीताजी अपने पति के प्रेम में मग्न थीं। हनुमानजी को विदा होने के लिए तैयार जानकर वे बार-बार उनकी ओर देखती रहीं और बोलीं-॥2॥
 
Sita was immersed in the love for her husband. Knowing that Hanumanji was ready to depart, she kept looking at him repeatedly and said -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)