श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.56.16 
स वानरसहस्राणां कोटीभिरभिसंवृत:।
क्षिप्रमेष्यति वैदेहि सुग्रीव: प्लवगाधिप:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘विदेहनन्दिनी! इसलिए वानरराज सुग्रीव हजारों-करोड़ों वानरों से घिरे हुए तुरन्त ही यहाँ आएँगे॥16॥
 
‘Videhanandini! Therefore, the monkey king Sugriva will immediately come here surrounded by thousands and crores of monkeys. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)