श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 55: सीताजी के लिये हनुमान् जी की चिन्ता और उसका निवारण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.55.17 
विनष्टायां तु सीतायां तावुभौ विनशिष्यत:।
तयोर्विनाशे सुग्रीव: सबन्धुर्विनशिष्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'यदि सीता का नाश हो गया, तो श्रीराम और लक्ष्मण दोनों भाई भी नष्ट हो जाएँगे। यदि उन दोनों का नाश हो गया, तो सुग्रीव भी अपने बन्धुओं सहित जीवित नहीं बचेगा।॥17॥
 
‘If Sita is destroyed, then both the brothers Shri Ram and Lakshman will also be destroyed. If both of them are destroyed then Sugreev along with his relatives will also not survive.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)