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धिगस्तु राजसं भावमनीशमनवस्थितम्।
ईश्वरेणापि यद् रागान्मया सीता न रक्षिता॥ १६॥
अनुवाद
यह राजस भाव कार्य करने में असमर्थ है और अव्यवस्थित है; इसे धिक्कार है; इस रजोगुणी क्रोध के कारण ही मैंने समर्थ होते हुए भी सीता की रक्षा नहीं की॥16॥
This Rajas emotion is incapable of accomplishing tasks and is disorganised; shame on it; because of this Rajoguna-based anger I did not protect Sita despite being capable.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥