श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 54: लङ्कापुरी का दहन और राक्षसों का विलाप  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.54.46 
देवाश्च सर्वे मुनिपुङ्गवाश्च
गन्धर्वविद्याधरपन्नगाश्च।
भूतानि सर्वाणि महान्ति तत्र
जग्मु: परां प्रीतिमतुल्यरूपाम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
उसके इस कार्य से समस्त देवता, ऋषि, गन्धर्व, विद्याधर, नाग और समस्त श्रेष्ठ प्राणी अत्यन्त प्रसन्न हुए। उनका आनन्द अतुलनीय था ॥46॥
 
All the gods, sages, Gandharvas, Vidyadharas, serpents and all the great beings were extremely pleased with his action. Their joy was incomparable. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)